आम आदमी पार्टी
उत्तर प्रदेश में अभी तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में नाकाम रही आम आदमी पार्टी (आप) ने अगले साल राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों पर ध्यान केंद्रित करेगी। पार्टी के नेताओं की मानें तो पंचायत चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन के आधार पर ही पार्टी का शीर्ष नेतृत्व 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कोई भी फैसला लेगा। पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव यूपी के ग्रामीण इलाकों में पैठ बनाने का बड़ा माध्यम बन सकते हैं। इस लिहाज से पार्टी ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक पूरी संभावना है कि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आप के बीच विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन समय आने पर हो जाएगा। उत्तर प्रदेश अभी भी आप के लिए एक अभेद्य किला बना हुआ है। पंचायत और नगर निकाय चुनावों को छोड़कर पार्टी राज्य में विधानसभा चुनावों में कोई सफलता हासिल नहीं कर पाई है। आप के लिए, राज्य में पंचायत चुनाव विधानसभा चुनावों जितने ही महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे पार्टी को राज्य भर में खासकर ग्रामीण इलाकों में अपना आधार बनाने में मदद मिलेगी।
आप के राज्य प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिलीप पांडे राज्य भर के सभी आठ क्षेत्रों में नियमित रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन और प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रहे हैं। इस साल फरवरी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आप के 12 साल के शासन को समाप्त करके दिल्ली में अपने राजनीतिक सूखे को समाप्त किया।
हालांकि, उपचुनाव में आप ने पंजाब के लुधियाना पश्चिम और गुजरात के विसावदर में जीत हासिल की। कांग्रेस ने केरल की नीलांबुर सीट पर कब्ज़ा किया, भाजपा ने गुजरात के कादी में अपना गढ़ बरकरार रखा, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के कालीगंज पर आसानी से कब्ज़ा कर लिया।
आप के पूर्व गुजरात प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया ने विसावदर में भाजपा के किरीट पटेल को 17,554 मतों से हराकर शानदार जीत हासिल की थी। कांग्रेस के नितिन रणपरिया काफ़ी पीछे रहे और उन्हें केवल 5,501 मत ही मिले। आप ने दिसंबर 2022 में गुजरात विधानसभा चुनाव में पदार्पण किया और पांच सीटें जीतीं थीं।
उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों को लेकर आप के वरिष्ठ नेता और राज्य में पार्टी के सह-प्रभारी दिलीप पांडे ने बताया कि, “फिलहाल पार्टी पूरी तरह से पंचायत चुनावों पर केंद्रित है। किसी भी पार्टी के साथ विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन पर कोई भी फैसला उसके बाद लिया जाएगा। आप कार्यकर्ता पार्टी का संदेश फैलाने के लिए हर गांव, घर और वार्ड में जाएंगे, जिसमें पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल की ‘काम की राजनीति’ और आप नेता संजय सिंह की ‘सेवा और संघर्ष की राजनीति’ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
पांडे ने कहा, “पार्टी आगामी पंचायत चुनावों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में अपना संगठन तैयार करेगी और 75 जिलों, 826 ब्लॉकों और लगभग 57,000 ग्राम पंचायतों में अपनी उपस्थिति मजबूत करेगी।”
इंडियन पालिटिक्स डेस्क