जयपुर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए और वहां से पढ़कर देश-विदेश में अपनी सफलता का परचम लहराने वाले पूर्व छात्रों के लिए भजनलाल सरकार ने एक नई पहल की शुरुआत करने जा रही है। शिक्षा विभाग ने प्राइवेट कॉन्वेंट और बड़े पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर राज्य के सभी राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 'एलुमनाई मीट' आयोजित करने का फैसला लिया है। 'सखा संगम' नाम से आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों से निकले सफल नागरिकों को उनकी पुरानी जड़ों, गुरुजनों और वर्तमान में पढ़ रहे छोटे बच्चों से दोबारा जोड़ना है।
16 से 23 नवंबर तक चलने वाले इस सप्ताह भर के आयोजन से न केवल पुरानी यादें ताजा होंगी, बल्कि पूर्व छात्रों के अनुभव, मार्गदर्शन और आर्थिक व तकनीकी सहयोग से राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट क्लासरूम और इनोवेशन को एक नई दिशा मिलेगी।
हर स्कूल में बनेगा 'पूर्व विद्यार्थी मंच', चुने जाएंगे अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष
'सखा संगम' कार्यक्रम को सिर्फ एक दिन का औपचारिक समारोह बनाने के बजाय एक स्थायी व्यवस्था का रूप दिया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल में 'पूर्व विद्यार्थी मंच' का विधिवत गठन किया जाएगा।
इस मंच के गठन में स्थानीय नागरिकों, सेवारत व सेवानिवृत्त शिक्षकों और स्कूल के पुराने विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। लोकतांत्रिक और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत इस मंच की एक कार्यकारिणी कार्यकारिणी समिति बनाई जाएगी, जिसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष सहित प्रमुख पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा।
यह कमेटी केवल कार्यक्रम का आयोजन ही नहीं करेगी, बल्कि भविष्य में भी स्कूल की जरूरतों, फंड मैनेजमेंट, कंप्यूटर लैब के विकास और गरीब व मेधावी बच्चों को स्कॉलरशिप देने जैसी गतिविधियों में लगातार सहयोग करेगी।
पूर्व छात्रों का बनेगा डिजिटल डाटाबेस
सालों पहले स्कूल छोड़ चुके पूर्व विद्यार्थियों को खोजना और उनसे संपर्क साधना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए शिक्षा विभाग ने जमीनी स्तर पर एक मजबूत योजना तैयार की है। प्रत्येक सरकारी स्कूल अपने वर्षों पुराने एसआर (Scholastic Record) रजिस्टर को खंगालेगा और वहां दर्ज नाम-पते के आधार पर पूर्व छात्रों की सूची तैयार करेगा।
हर स्कूल में एक वरिष्ठ शिक्षक को 'नोडल प्रभारी' नियुक्त किया जाएगा। इस शिक्षक की जिम्मेदारी होगी कि वे फोन कॉल, सोशल मीडिया ग्रुप्स और स्थानीय नेटवर्क के जरिए पूर्व छात्रों से संपर्क करें।
गांव या शहर से बाहर, दूसरे प्रदेशों या विदेशों में रह रहे पूर्व छात्रों को डिजिटल इनविटेशन कार्ड भेजकर 16 से 23 नवंबर के बीच आयोजित होने वाली इस एलुमनाई मीट में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया जाएगा।
शाला दर्पण पोर्टल से रियल-टाइम मॉनिटरिंग
इस पूरे अभियान को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने राजस्थान के प्रसिद्ध 'शाला दर्पण पोर्टल' पर इसके लिए एक समर्पित मॉड्यूल विकसित करने का निर्णय लिया है।
शाला दर्पण पोर्टल पर हर स्कूल को अपने यहां गठित 'पूर्व विद्यार्थी मंच' के सदस्यों के नाम, पंजीकृत पूर्व छात्रों की संख्या, और 16 से 23 नवंबर के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की फोटो व पूरी रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी होगी।
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और राज्य स्तर के उच्च अधिकारी पोर्टल के जरिए इस पूरे आयोजन की दिन-प्रतिदिन मॉनिटरिंग करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर स्कूल में यह आयोजन पूरी गंभीरता और उत्साह के साथ संपन्न हो।
बच्चों को मिलेगा मार्गदर्शन
राजस्थान के दूर-दराज ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पास अक्सर सही करियर गाइडेंस और मेंटरशिप का अभाव रहता है। 'सखा संगम' के माध्यम से यह दूरी समाप्त होगी। जब उसी गांव के सरकारी स्कूल पर पढ़ाई करने वाला कोई व्यक्ति आज आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), डॉक्टर, इंजीनियर, सेना का जवान, बड़ा बिजनेसमैन या जनप्रतिनिधि बनकर स्कूल के मंच पर पहुंचेगा, तो वह वर्तमान विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा रोल मॉडल बनेगा।
पूर्व छात्र अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करेंगे, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास जगेगा और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के टिप्स भी मिलेंगे।
स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में सुधार की नई उम्मीद
प्राइवेट स्कूलों में एलुमनाई नेटवर्क का उपयोग स्कूल की फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में किया जाता है। राजस्थान सरकार इसी मॉडल को अब अपने सरकारी स्कूलों में लागू कर रही है।
अक्सर सरकारी स्कूलों में फर्नीचर, वॉटर कूलर, खेल सामग्री, लाइब्रेरी की किताबों या कंप्यूटर लैब की कमी होती है। 'पूर्व विद्यार्थी मंच' के माध्यम से संपन्न और सक्षम पूर्व छात्र भामाशाह बनकर अपने पुराने स्कूल की इन कमियों को दूर करने में आगे आ सकेंगे। इससे सरकार के बजट पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से सरकारी शिक्षा प्रणाली का स्तर प्राइवेट स्कूलों के समकक्ष खड़ा हो सकेगा।