नई दिल्ली
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है. सरमा ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस को देश के लोगों से माफी मांगनी चाहिए. उनका कहना है कि कांग्रेस लगातार यह आरोप लगा रही थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले फैसले ले रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने साफ किया है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.
हिमंत सरमा ने कहा, 'अब राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए देश के लोगों से माफी मांगने का समय आ गया है. आपने बार-बार चुनाव आयोग पर हमला किया और कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले फैसले लिए. लेकिन अब पूरे आयोग ने एक साथ कहा है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए.' सरमा ने सवाल किया कि कांग्रेस ने किस आधार पर चुनाव आयोग पर आरोप लगाए और लोगों के मन में भ्रम पैदा करने की कोशिश क्यों की. उन्होंने राहुल गांधी पर एक के बाद एक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी हार के कारणों पर विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि 2014 में भी कांग्रेस लोकसभा चुनाव हारी थी, जबकि उस समय का चुनाव आयोग मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान नियुक्त हुआ था. सरमा ने कहा, 'राहुल गांधी को इस बात पर विचार करना चाहिए कि लोग कांग्रेस को बार-बार क्यों नकार रहे हैं. लेकिन कांग्रेस अपनी हार की समीक्षा नहीं करती. वह उन राज्यों में जाकर यह जानने की कोशिश नहीं करती कि आखिर हार क्यों हुई.'
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब वह चुनाव हारती है तो EVM पर सवाल उठाती है, लेकिन जीतने पर EVM को लेकर कोई सवाल नहीं किया जाता. सरमा ने कहा कि इसी तरह BJP की जीत के बाद SIR को गलत बताया जा रहा है. चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक के बाद कहा था कि SIR से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए थे. आयोग ने यह भी कहा कि सदस्यों की अलग-अलग टिप्पणियां और सुझाव उसकी आंतरिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
हिमंत सरमा ने विपक्षी INDIA गठबंधन पर भी हमला बोला. उन्होंने इसे 'हारे और निराश लोगों का गठबंधन' बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करना है. उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की बैठकों का देश की जनता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इससे पहले भी हिमंत सरमा ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा था कि आयोग एक सामूहिक संस्था है और उसके फैसले सहमति या बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं.