विशेष साक्षात्कार ¦ डॉ. अविनाश रुद्रप्रकाश
डॉ. अविनाश रुद्रप्रकाश एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले शिक्षित उद्यमी और समाजसेवी हैं। स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रबंधन और सामाजिक सरोकारों के अनुभव के आधार पर वे जनकल्याण, युवाओं के अवसर, महिला सशक्तीकरण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधाएँ पहुँचाने को प्राथमिकता देते हैं। उनकी राजनीतिक आस्था भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को अपना आदर्श एवं गुरुदेव तथा केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। उनका विश्वास है कि विकसित भारत का संकल्प तभी सिद्ध होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे और हर नागरिक को सम्मान, सुरक्षा तथा बेहतर जीवन के अवसर मिलें।
प्रश्न 1. डॉ. अविनाश जी, सबसे पहले अपने बारे में बताइए। आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा और जीवन की यात्रा कैसी रही है?
उत्तर: मैं एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आता हूँ, जहाँ कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी। मेरी यात्रा शिक्षा और परिश्रम के बल पर आगे बढ़ी है। मैंने JNU से स्पेनिश में एम.ए., दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट (Ph.D.) और विधि (Law) की शिक्षा प्राप्त की। स्वास्थ्य सेवाओं और संस्थागत प्रबंधन के अनुभव ने मुझे सिखाया कि किसी व्यवस्था की वास्तविक सफलता आम नागरिक के लिए उसकी संवेदनशीलता और उपयोगिता में है। मेरा ध्येय किसी पद की लालसा नहीं, बल्कि पूरी निष्ठा से समाज के हित में काम करना है।
प्रश्न 2. आप स्वयं को किस रूप में देखते हैं—राजनीतिज्ञ, उद्यमी या समाजसेवी?
उत्तर: मैं स्वयं को किसी औपचारिक दायरे में बाँधने के बजाय समाज का एक समर्पित सेवक मानता हूँ। शिक्षा ने मुझे दृष्टि दी, प्रबंधन ने संगठन क्षमता और समाजसेवा ने जीवन को सार्थकता। मेरे लिए राजनीति सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा का संगठित मंच है। मैं पद से अधिक दायित्व को, प्रचार से अधिक धरातलीय कार्य को और व्यक्तिगत पहचान से अधिक सामाजिक परिणाम को महत्त्व देता हूँ।
प्रश्न 3. आपके लिए जनसेवा का क्या अर्थ है? क्या यह केवल सामाजिक कार्य है या जीवन का उद्देश्य?
उत्तर: मेरे लिए जनसेवा कोई अंशकालिक कार्य नहीं, बल्कि जीवन का स्थायी संस्कार और ध्येय है। इसका वास्तविक अर्थ केवल तात्कालिक सहायता देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता के योग्य बनाना है—चाहे वह गरीब बच्चे की शिक्षा हो या मरीज का समय पर उपचार। जब सेवा के पीछे कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं होता, तभी वह व्यवस्था को मानवीय और संवेदनशील बना पाती है।
प्रश्न 4. आप अपने लिए किन शब्दों का प्रयोग पसंद करेंगे—समाजसेवी, जनसेवक या गरीबों का मसीहा?
उत्तर: मैं स्वयं को केवल ‘जनसेवक’ कहलाना पसंद करूँगा। ‘मसीहा’ शब्द केवल ईश्वर और संतों के लिए है। एक सेवक के मन में अहंकार नहीं होता; वह जनता के प्रति जवाबदेह रहकर समाज का ऋण चुकाने का भाव रखता है। पद और पहचान समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन सेवा का भाव स्थायी रहता है। मेरी पहचान केवल इस बात से हो कि संकट के समय मैं जनता के साथ मजबूती से खड़ा रहा।
प्रश्न 5. आपके जीवन और सार्वजनिक चिंतन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी और श्री गिरिराज सिंह जी की क्या प्रेरणा और भूमिका रही है? उनके सार्वजनिक जीवन और अनुभवों से आप क्या सीखते हैं?
उत्तर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मेरे आदर्श एवं गुरुदेव हैं। 2001 से गुजरात और 2014 से देश के शासन-प्रमुख के रूप में उनके 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन से मैंने सीखा कि पहचान पद से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से बनती है। उन्होंने विकास को जनभागीदारी का जनांदोलन बनाया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के गोरखपुर में स्वास्थ्य व सामाजिक सेवा कार्यों और उनके प्रशासनिक अनुशासन ने मुझे जनसेवा के प्रति दृढ़ किया। केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह जी के राजनीतिक अनुभव व जनसरोकारों से भी मुझे निरंतर प्रेरणा मिलती है। इन सभी से मेरी सबसे बड़ी सीख यही है कि “पद से अधिक महत्त्वपूर्ण उद्देश्य है, तुलना से अधिक महत्त्वपूर्ण कर्म है और अपेक्षा से अधिक महत्त्वपूर्ण सेवा है।”
प्रश्न 6. आप एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और आपका कोई राजनीतिक परिवार नहीं रहा। भाजपा के प्रति आपकी आस्था का क्या आधार है?
उत्तर: गैर-राजनीतिक परिवार से होने के नाते भाजपा के प्रति मेरी आस्था किसी विरासत की नहीं, बल्कि वैचारिक मूल्यों की देन है। भाजपा का ‘राष्ट्र-प्रथम’ का संकल्प और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का ‘अंत्योदय’ दर्शन (अंतिम व्यक्ति का उत्थान) मेरे जीवन-मूल्यों से गहराई से जुड़े हैं। भाजपा में व्यक्ति से बड़ा संगठन और संगठन से बड़ा देश होता है, जहाँ एक सामान्य पृष्ठभूमि के व्यक्ति को भी राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का पूरा अवसर मिलता है।
प्रश्न 7. सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय को आप किस प्रकार जोड़कर देखते हैं?
उत्तर: सामाजिक न्याय और सामाजिक समरसता परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। बाबा साहेब आंबेडकर ने संवैधानिक न्याय के साथ बंधुता पर बल दिया और पंडित दीनदयाल जी ने अंत्योदय का मार्ग दिखाया। समरसता के बिना न्याय अधूरा है और न्याय के बिना समरसता टिक नहीं सकती। सच्चा सामाजिक न्याय तभी सार्थक है जब बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक को शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और आजीविका के समान अवसर मिलें।
प्रश्न 8. ‘मन की बात’ से समाज और जनभागीदारी के बारे में क्या सीख मिलती है?
उत्तर: ‘मन की बात’ से सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि सक्रिय जनभागीदारी से होता है। यह मंच उन अनसुने जमीनी नायकों को राष्ट्रीय पहचान देता है जो बिना प्रचार के स्वच्छता, जल संरक्षण और समाजसेवा में जुटे हैं। इससे प्रेरणा मिलती है कि सार्वजनिक जीवन में केवल समस्याओं की चर्चा करने के बजाय धरातल पर समाधान करने वाले प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए।
प्रश्न 9. भारत को विश्व के मानचित्र पर अधिक मजबूत स्थान दिलाने में शिक्षा और युवाओं की क्या भूमिका है?
उत्तर: भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी और ज्ञान-परंपरा है। इस जनसांख्यिकीय शक्ति का लाभ तभी मिलेगा जब युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और नवाचार का परिवेश मिले। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) ने शिक्षा को कौशल और भारतीय मूल्यों से जोड़ा है। जब हमारे युवा विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता में अग्रणी बनेंगे, तभी भारत उपभोक्ता बाजार से आगे बढ़कर एक वैश्विक ज्ञान-अर्थव्यवस्था बनेगा।
प्रश्न 10. महिलाओं के सशक्तीकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर: महिला सशक्तीकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न होकर आर्थिक स्वावलंबन और निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों (SHG) को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, आसान संस्थागत ऋण और सीधा बाजार लिंकेज देना आवश्यक है। जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है, तो पूरे परिवार की शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर सुधरता है। ‘महिला नेतृत्व आधारित विकास’ ही विकसित समाज की नींव है।
प्रश्न 11. महिला स्वावलंबन और रोजगार के लिए कौन–सी योजनाएँ महत्त्वपूर्ण हैं?
उत्तर: ‘लखपति दीदी’, ‘मुद्रा योजना’, ‘नमो ड्रोन दीदी’ और ‘स्टैंड-अप इंडिया’ जैसी योजनाएँ महिलाओं को आर्थिक शक्ति दे रही हैं। उत्तर प्रदेश में ‘बीसी सखी’ (बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट) मॉडल ने महिलाओं को घर-घर वित्तीय सेवाओं से जोड़कर नियमित आय का साधन दिया है। आवश्यकता इस बात की है कि इन महिला समूहों के उत्पादों को बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों से जोड़कर राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराया जाए।
प्रश्न 12. गरीबों और वंचित वर्गों के लिए सरकारी योजनाओं की क्या भूमिका है?
उत्तर: कल्याणकारी योजनाएँ वंचित वर्गों को गरीबी के कुचक्र से बाहर निकालने का सुरक्षा कवच हैं। पीएम आवास ने पक्की छत दी, आयुष्मान भारत ने इलाज के भारी खर्च से बचाया और उज्ज्वला व जल जीवन मिशन ने रोजमर्रा के जीवन को गरिमा दी। जब किसी गरीब परिवार की आवास, भोजन और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चिंताएँ दूर होती हैं, तभी वह अपने बच्चों के भविष्य और शिक्षा के बारे में आत्मविश्वास से सोच पाता है।
प्रश्न 13. उत्तर प्रदेश सरकार की किन योजनाओं का लाभ आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना आवश्यक है?
उत्तर: प्रदेश सरकार की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं का लाभ धरातल तक पहुँचना आवश्यक है:
- आवास एवं बुनियादी सुविधाएँ: पीएम/सीएम आवास योजना, हर घर नल से जल और उज्ज्वला योजना।
- स्वास्थ्य सुरक्षा: आयुष्मान भारत एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना (₹5 लाख तक कैशलेस उपचार)।
- किसान कल्याण: पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और नलकूपों के लिए मुफ्त बिजली।
- महिला एवं बालिका विकास: मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, निराश्रित महिला पेंशन व मिशन शक्ति।
- युवा व शिक्षा: मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना (मुफ्त कोचिंग) और स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण (टैबलेट/स्मार्टफोन)।
प्रश्न 14. योजनाएँ उपलब्ध होने के बावजूद कई गरीब और जरूरतमंद लोग लाभ से वंचित क्यों रह जाते हैं?
उत्तर: इसके मुख्य रूप से चार जमीनी कारण हैं:
- जागरूकता का अभाव: दूरदराज के क्षेत्रों में पात्रता व आवेदन प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी न होना।
- दस्तावेजी त्रुटियाँ: आधार, आय, जाति प्रमाण पत्र या बैंक खाते में नाम-पते की मामूली विसंगतियों से आवेदन निरस्त होना।
- डिजिटल विभाजन: ऑनलाइन प्रक्रियाओं के कारण गरीब नागरिकों की साइबर कैफे या बिचौलियों पर निर्भरता।
- प्रशासनिक जटिलता: शिकायतों का समयबद्ध समाधान न होने से बार-बार चक्कर लगाकर लोगों का निराश होना।
प्रश्न 15. उत्तर प्रदेश में योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं?
उत्तर: योजनाओं की शत-प्रतिशत पहुँच (सैचुरेशन) के लिए मैं पाँच ठोस उपाय सुझाता हूँ:
- पंचायत व वार्ड स्तरीय शिविर: ब्लॉक जाने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही बहु-विभागीय समाधान शिविर लगें।
- दस्तावेज सुधार मोबाइल वैन: आधार, राशन कार्ड और बैंक विसंगतियों को मौके पर ही ठीक करने की व्यवस्था हो।
- पारदर्शी जनसेवा केंद्र (CSC): हर न्याय पंचायत में सक्रिय सीएससी हों, जहाँ निर्धारित दरों पर काम हो।
- डिजिटल सैचुरेशन ट्रैकर: एक एकीकृत पोर्टल बने जो बताए कि किस परिवार को किस बुनियादी योजना की दरकार है।
- जवाबदेह शिकायत निवारण: आईजीआरएस (IGRS) शिकायतों का निस्तारण केवल कागजी न होकर नागरिक की संतुष्टि पर आधारित हो।
प्रश्न 16. सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुँचे?
उत्तर: योजनाओं की सफलता घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनकी कुशल डिलीवरी से तय होती है। इसके तीन आधार होने चाहिए: • सुलभता (Accessibility): प्रक्रिया इतनी सरल हो कि सामान्य व्यक्ति बिना बिचौलियों के लाभ ले सके। • समयबद्धता (Timelines): आवेदन से लाभ वितरण तक की निश्चित समय-सीमा तय हो। • संवेदनशील प्रशासन (Empathetic Governance): प्रशासनिक तंत्र नागरिकों की समस्या को आत्मीयता से सुने।
तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता का यही संगम अंत्योदय को साकार करेगा।
प्रश्न 17. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के विकास को आप किस दृष्टि से देखते हैं?
उत्तर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने सुरक्षा, सुशासन और विकास का अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था के कारण आज यूपी देश भर के निवेशकों का पसंदीदा केंद्र बन चुका है। एक्सप्रेसवे का जाल, हवाई अड्डों का विस्तार, हर जिले में मेडिकल कॉलेज, ‘ओडीओपी’ (ODOP) और सांस्कृतिक पर्यटन का कायाकल्प राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर ले जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि विकास के केंद्र में गरीब कल्याण सर्वोपरि रहा है।
प्रश्न 18. उत्तर प्रदेश के विकास के लिए आने वाले वर्षों में किन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
उत्तर: उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए आगामी वर्षों में छह प्रमुख प्राथमिकताएँ होनी चाहिए:
- कृषि व ग्रामीण आजीविका: किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और फूड-प्रोसेसिंग।
- एमएसएमई (MSME) सशक्तीकरण: स्थानीय उद्योगों को आसान ऋण व आधुनिक तकनीक देकर हर जिले में रोजगार।
- भविष्य–उन्मुख शिक्षा: युवाओं को एआई (AI), डेटा और नई तकनीकों के अनुरूप उद्योग-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण।
- सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था: जिला स्तर पर सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं को मजबूत कर महानगरों पर दबाव घटाना।
- बुनियादी ढाँचा: 24 घंटे बिजली, शुद्ध पेयजल, बेहतर सड़कें और आधुनिक जल-निकासी (ड्रेनेज)।
- पर्यटन उद्योग: धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय सेवा क्षेत्र में आजीविका का विस्तार।
प्रश्न 19. ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ और ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ से उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कैसे लाभ मिल सकता है?
उत्तर: ‘एक जनपद–एक उत्पाद’ (ODOP) ने प्रदेश के पारंपरिक शिल्पकारों को वैश्विक मंच प्रदान किया है। इसी तर्ज पर ‘एक जनपद–एक व्यंजन’ (ODOC) भी स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए क्रांतिकारी सिद्ध हो सकता है। उत्तर प्रदेश की पाक-कला और खान-पान में समृद्ध विविधता है। यदि हर जिले के पारंपरिक व्यंजनों को स्वच्छता मानकों, आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और पर्यटन से जोड़ दिया जाए, तो स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विकास होगा।
प्रश्न 20. ‘एक जनपद–एक मेडिकल कॉलेज’ के विचार को आप किस प्रकार देखते हैं?
उत्तर: हर जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना स्वास्थ्य समानता की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है। पहले गंभीर बीमारियों के लिए मरीजों को बड़े शहरों में भटकना पड़ता था। अब स्थानीय स्तर पर ही उच्चस्तरीय व विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो रहा है। इससे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता बढ़ रही है तथा अस्पताल के आसपास दवा, डायग्नोस्टिक्स और स्थानीय व्यापार की एक पूरी सहायक अर्थव्यवस्था विकसित हो रही है।
प्रश्न 21. आपके लिए ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का वास्तविक मानवीय अर्थ क्या है, और इस संकल्पना में किसानों की शुद्ध आय को तीन गुना करने तथा जिला–स्तरीय रोडमैप की क्या भूमिका होगी?
उत्तर: मेरे लिए ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ का मानवीय अर्थ है—जहाँ गरीब बच्चे को शिक्षा, बुजुर्ग को बिना भटके पेंशन, महिला को सुरक्षा व स्वावलंबन, मरीज को समय पर इलाज और किसान को उपज का लाभकारी मूल्य मिले। इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता का अंतिम पैमाना नागरिक के जीवन की खुशहाली है।
इसके लिए प्रत्येक जिले का एक समेकित विकास रोडमैप होना चाहिए। किसानों की आय को दीर्घकाल में तीन गुना करने के लिए केवल उत्पादन नहीं, बल्कि लागत घटाने और मूल्य संवर्धन पर काम करना होगा:
- वैज्ञानिक खेती व विविधीकरण: मिट्टी के अनुकूल खेती, ड्रिप सिंचाई और लाभकारी फसलें।
- भंडारण व प्रसंस्करण: ब्लॉक स्तर पर कोल्ड स्टोरेज और फूड-प्रोसेसिंग से सीधा बाजार जुड़ाव।
- सहकारिता व FPO: किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत कर बिचौलियों की भूमिका समाप्त करना।
- संबद्ध क्षेत्र: डेयरी, पशुपालन, मत्स्य व मधुमक्खी पालन को अतिरिक्त आय का साधन बनाना।
- नियमित मूल्यांकन: प्रत्येक जिले में किसानों की वास्तविक शुद्ध आय का नियमित जमीनी आकलन।
प्रश्न 22. युवाओं के लिए विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश का क्या अर्थ है?
उत्तर: युवाओं के लिए विकास का अर्थ केवल आँकड़े नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी अवसरों की उपलब्धता है। इसके मुख्य आयाम हैं—व्यावहारिक कौशल देने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी व समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया, स्टार्टअप्स के लिए आसान ऋण व मेंटरशिप, और उभरती तकनीकों में निरंतर कौशल संवर्धन। वास्तविक विकास वह है जब राज्य के युवा को रोजगार के लिए मजबूरन पलायन न करना पड़े, बल्कि यूपी में ही उसके सपनों को नई उड़ान मिले।
प्रश्न 23. लखनऊ पूर्वी क्षेत्र से आपका जुड़ाव क्या है और वहाँ के विकास के लिए आपकी प्राथमिकताएँ क्या होंगी?
उत्तर: लखनऊ पूर्वी से मेरा गहरा आत्मीय जुड़ाव है। इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए मेरी पाँच प्रमुख प्राथमिकताएँ हैं:
- नागरिक सुविधाएँ: जल-निकासी (ड्रेनेज), सीवर और आंतरिक सड़कों का आधुनिक सुधार।
- ट्रैफिक व पार्किंग: प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गों पर स्मार्ट ट्रैफिक और व्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था।
- युवा करियर केंद्र: विद्यार्थियों के लिए आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी, स्टडी सेंटर और करियर गाइडेंस हब।
- पार्क व पर्यावरण: पार्कों का सुंदरीकरण, बच्चों के खेल के मैदान और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित वॉकिंग ट्रैक।
- स्वास्थ्य सुलभता: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (UPHC) को आधुनिक उपकरणों व विशेषज्ञ डॉक्टरों से सुसज्जित करना।
प्रश्न 24. विकसित भारत 2047 की कल्पना में लखनऊ पूर्वी की क्या भूमिका हो सकती है?
उत्तर: विकसित भारत 2047 की नींव सशक्त और जागरूक विधानसभा क्षेत्रों से ही रखी जाएगी। लखनऊ पूर्वी राजधानी का प्रबुद्ध, शिक्षित और जीवंत क्षेत्र होने के नाते एक ‘आदर्श नगरीय मॉडल’ बन सकता है: • ज्ञान व सेवा अर्थव्यवस्था: आईटी, वित्तीय सेवाओं, शिक्षा और स्टार्टअप्स का प्रमुख केंद्र। • हरित व स्मार्ट नगरीय जीवन: सौर ऊर्जा का व्यापक उपयोग, जीरो-वेस्ट वार्ड प्रबंधन और जल संरक्षण। • सक्रिय जनभागीदारी: विकास कार्यों और नीति-निर्माण में आरडब्ल्यूए (RWA) और प्रबुद्ध नागरिकों की सीधी साझेदारी।
प्रश्न 25. आप भाजपा के मिशन 2027 और अपनी संभावित सार्वजनिक भूमिका को किस दृष्टि से देखते हैं?
उत्तर: भाजपा केवल एक चुनावी दल नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का विराट वैचारिक आंदोलन है। मिशन 2027 का लक्ष्य प्रदेश में सुरक्षा, सुशासन और विकास की गति को और तेज करना है। जहाँ तक मेरी भूमिका का प्रश्न है, मैं एक समर्पित कार्यकर्ता हूँ। पद की लालसा व्यक्ति की दृष्टि को सीमित करती है, जबकि सेवा का भाव अनंत अवसर देता है। संगठन मेरे लिए जो भी जिम्मेदारी तय करेगा, उसे पूरी निष्ठा और अनुशासन से निभाऊँगा। मेरे लिए पद से बड़ा संगठन का आदेश और जनता की सेवा है।
प्रश्न 26. यदि आपको संगठनात्मक स्तर पर जनसेवा का अवसर मिले, तो आप कार्यकर्ताओं और नागरिकों के साथ किस प्रकार काम करना चाहेंगे?
उत्तर: मेरी कार्यशैली चार सूत्रों पर आधारित होगी:
- संवाद और सहज उपलब्धता: कार्यकर्ताओं व नागरिकों के लिए हमेशा सुलभ रहना और धैर्य से सुनना।
- कार्यकर्ताओं का सम्मान: संगठन की रीढ़ स्वरूप समर्पित कार्यकर्ताओं के स्वाभिमान और समस्याओं को प्राथमिकता देना।
- टीम भावना: वरिष्ठों के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा का समन्वय बनाकर कार्य करना।
- समाधान–उन्मुख दृष्टिकोण: जनता की समस्याओं का प्रशासन व संगठन के तालमेल से समयबद्ध निवारण करना।
मैं जनता और शासन के बीच एक मजबूत और संवेदनशील सेतु की भूमिका निभाना चाहूँगा।
प्रश्न 27. अंत में, आप समाज और युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: मैं युवाओं से यही कहूँगा कि वे अपनी क्षमता और सकारात्मक सोच पर विश्वास रखें। अपनी व्यक्तिगत सफलता के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्ग के उत्थान में भी अपना योगदान दें, क्योंकि सार्वजनिक जीवन में सम्मान शब्दों से नहीं, बल्कि आचरण और सेवा से मिलता है। हमारा लक्ष्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुँचाना, युवाओं को अवसर देना और समरसता को मजबूत करना है।
मेरी व्यक्तिगत भावना इन पंक्तियों में निहित है:
“मेरे शरीर का कण–कण, मेरे जीवन का क्षण–क्षण और मेरे खून का कतरा–कतरा जनसेवा के लिए समर्पित रहे।”
मेरा सामाजिक संकल्प है:
“स्वस्थ समाज • सशक्त युवा • समृद्ध लखनऊ।”
और मेरा ध्येय-वाक्य है:
“सेवा परमो धर्मः, लोकहितं मम संकल्पः।”
(अर्थात्: सेवा ही सर्वोच्च धर्म है और जनकल्याण ही मेरा संकल्प है।)