विजय राय
देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार और सहारा ग्रुप के समूह संपादक रहे डॉ विजय राय नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद हार्ट अटैक की वजह से रविवार को उनका निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। विजय राय पत्रकारिता के स्तंभ थे। पत्रकारिता उनके अंदर कूटकूटकर भरी थी। खासतौर से उन्होंने पत्रकारिता जगत में ढाई दशकों तक एक प्रतिमान स्थापित किया जिसका हर कोई कायल है।
यह दुखद खबर सामने आते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जम्मू कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत कई जानी मानी हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
योगी के अलावा यूपी के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने भी दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इसके अलावा भारत एक्सप्रेस मीडिया हाउस के चेयरमैन उपेंद्र राय समेत मीडिया जगत की कई हस्तियों ने भी विजय राय को अपनी श्रद्धांजलि दी। उपेंद्र राय ने विजय राय को याद करते हुए अपने सोशल अकाउंट पर लिखा, “विजय राय भइया नहीं रहे। उनका जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति की तरह है। उनके साथ कई देशों का दौरा करने का अवसर मिला। करीब ढाई दशक तक उनका आशीर्वाद मिला। उनका शरीर जरूर गया है लकिन उनके साथ बिताए गए पल और यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।”
देश के जाने मामने वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने अपनी यादें साझा करते हुए कहा, विजय राय का जाना पत्रिकारिता जगत की बड़ी क्षति है। विजय राय हमेशा ही सत्ता के गलियारे में मुलाकात हो जाती थी। अपने रिपोर्टिंग के दिनों में वह अपने काम को लेकर हमेशा सजग और गंभीर रहते थे। अनुजतुल्य साथी, बेहद मिलनसार और सजह स्वभाव के धनी विजय राय का निधन अत्यंत ही दुखद है।
बताते चलें कि विजय राय जी मूलतः पूर्वांचल के कुशीनगर जिले से ताल्लुकात रखते थे और पत्रकारिता में आने से पहले वह अपने गृह जिले में शिक्षा जगत में योगदान दे चुके थे। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से पीएचडी करने के बावजूद विजय राय जी ने दलित, दमित, शोषित और वंचित वर्ग को उनका हक एवं अधिकार दिलाने के लिए पत्रकारिता की राह अपने जीवन के आखिरी लम्हे तक पकड़े रखा।
इस दरम्यान डॉ० विजय राय ने कई संस्थानों में काम किया। सहारा मीडिया समूह में उन्होंने संवाददाता से समूह सम्पादक तक का सफ़र तय करते हुए विशुद्ध पत्रकारिता करके पत्रकारिता धर्म के निर्वहन के साथ – साथ जरूरतमन्दो की हर सम्भव मदद की।
डॉ० विजय राय का मऊ जनपद से बहुत पुराना नाता रहा है क्योंकि इनके पिताजी मऊ जिले में कोतवाल रह चुके हैं। स्व० विजय राय जी के दो छोटे भाई हैं जिसमें प्रदीप राय जी देश के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं वहीं विनय राय जी देश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। डॉ० विजय राय जी हँसमुख, विनम्र, सरल और मिलनसार व्यक्ति थे जो पहली मुलाक़ात में ही अपनी छाप छोड़ देते थे। देश भर में उनको जानने एवं चाहने वाले हज़ारों मीडियाकर्मी हैं।
बताने वाले बताते हैं कि जब विजय राय कोई किस्सा सुनाते थे तो प्रवाह ऐसा होता था कि उनके साथ बैठे कई घण्टे हो जाने के बाद ही पता चलता था की इतना समय हो गया है। विजय भईया के ऑफिस में बैठकर समोसा खाते हुए कहानियां सुनना मुझे बहुत अच्छा लगता था।
विजय राय के करीबी दिव्येंदु राय ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि, ”आखिरी बार स्व० सुब्रत रॉय सहारा के निधन के दरम्यान घाट पर मुलाकात हुई थी। लाइव देते समय अचानक विजय भईया दिख गए थे और मुझे देखकर मुस्कुराने लगे। लाइव खत्म होने के बाद मैं जाकर विजय भईया से मिला लेकिन मुझे इस बात का अंदाजा बिल्कुल नही था कि विजय भईया के साथ मेरी यह मुलाकात आख़िरी होकर रह जाएगी।”
कुछ महीनों से उनका टाटा मेमोरियल मुंबई में इलाज चल रहा था। आज सुबह नोएडा के अपने आवास में तकरीबन साढ़े चार बजे उन्होंने आख़िरी साँस ली।
इंडियन पॉलिटिक्स ब्यूरो।