पंकज चौधरी
उत्तर प्रदेश भाजपा को 14 दिसंबर को आखिरकार नया प्रदेश अध्यक्ष मिल जाएगा। काफी लंबे समय से इसे लेकर भाजपा में प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर मंथन हो रहा था। यूपी भाजपा अध्यक्ष के लिए पंकज की नियुक्ति इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि भाजपा की ओर से किसी और ने पर्चा दाखिल नहीं किया है। साल 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों को देखते हुए पंकज चौधरी का भाजपा अध्यक्ष बनना बेहद अहम माना जा रहा है।
दरअसल,बीते लोकसभा चुनाव में यूपी में अखिलेश यादव का पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) दांव काफी सफल रहा था, उस चुनाव में यूपी में भाजपा को बीते चुनाव की तुलना में नुकसान भी हुआ था, ऐसे में कहा ये भी जा रहा है कि अखिलेश यादव के इस दांव को फेल करने के लिए ही भाजपा ने पंकज चौधरी के नाम पर मुहर लगाई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंकज को भाजपा के शीर्ष नेताओं का भी समर्थन प्राप्त है।
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी कुर्मी बिरादरी से आते हैं। यूपी में ओबीसी वोटरों में कुर्मी समुदाय करीब आठ प्रतिशत है। यादव के बाद कुर्मी प्रदेश की सबसे बड़ी आबादी है। सात बार के सांसद रहे पंकज की पैठ पूर्वांचल के कुर्मियों खूब है। बीते लोकसभा चुनावों में पूर्वांचल में कुर्मी वोट छिटक गया था, जिससे भाजपा को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा। ऐसे में पंकज चौधरी कुर्मी मतदाताओं को वापस भाजपा में लाने में काफी हद तक सफल हो सकते हैं।
पंकज चौधरी का जन्म पूर्वांचल के बड़े औद्योगिक घराने में 20 नवंबर 1964 को हुआ था। इतना ही नहीं उनके परिवार की राजनैतिक पृष्ठभूमि भी है। पंकज चौधरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई एमपी इंटर कॉलेज और फिर उच्च शिक्षा गोरखपुर विश्वविद्यालय से ग्रहण की। पंकज चौधरी की मां उज्जवल चौधरी भी महाराजगंज की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। वे वर्तमान में फेमस राहत रूह तेल बनाने वाली कंपनी हरबंशराम भगवानदास आयुर्वेदिक संस्थान प्राइवेट लिमिटेड के मालिक है। यह कंपनी तेल, शैंपू, और कई अन्य आयुर्वेदिक उत्पाद बनाती है। यूपी और खासकर पूर्वांचल में यह दर्द निवारक तेल काफी फेमस है।
पंकज चौधरी और उनके परिवार का महाराजगंज जिला पंचायत में अध्यक्ष पद पर हमेशा से दबदबा रहा है। महाराजगंज जिला पंचायत जब अस्तित्व में आई उसके बाद पंकज चौधरी के बड़े भाई स्वर्गीय प्रदीप चौधरी इसके पहले अध्यक्ष बने। इसके बाद उनकी मां उज्जवल ने लगातार दो बार महाराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। इसके बाद भी उनका दबदबा कम नहीं हुआ। उन्होंने जिसको चाहा उसे जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। जब यूपी में वे विपक्ष में थे, तभी भी जिला पंचायत पर वे अजेय बने रहे।
पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत गोरखपुर नगर निगम में पार्षद के तौर पर 1989 में की। वे 1991 तक गोरखपुर नगर निगम के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने गोरखपुर नगर निगम के उप महापौर के रूप में भी काम किया। फिर जब महाराजगंज अलग बना तब से वे वहीं सक्रिय रहे।
साल 1990 में वे भाजपा के जिला कार्यसमिति के सदस्य बनाए गए। इसके बाद 1991 में 10वीं लोकसभा के लिए पंकज चौधरी पहली बार संसद पहुंचे। वे महाराजगंज सीट पर पहली ही बार में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। इसके बाद फिर वे 11 वीं लोकसभा और फिर 12 वीं लोकसभा में 1996 और 1998 में सांसद बने। फिर 1999 में उन्हें सपा के उम्मीदवार ने हरा दिया। हालांकि फिर 2004 के चुनावों में वे फिर से जीत कर सांसद बने।
इसके बाद 2009 में उन्हें कांग्रेस के हर्षवर्धन से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2014 में जब मोदी लहर पूरी तरह से प्रचंड थी तब वे फिर से जीत हासिल कर संसद पहुंचे। इसके बाद से वे लगातार सांसद हैं। इसके बाद जब नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार पीएम बने तो पंकज चौधरी ने बतौर सांसद छठी बार जीत हासिल की। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में पंकज चौधरी को केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद 2024 में जब वे फिर जीते तो फिर से उन्हें मंत्री पद मिला।
पंकज चौधरी को भाजपा का समर्पित कार्यकर्ता माना जाता है। पार्टी में शामिल होने के बाद से उन्होंने कभी भी संगठन से किनारा नहीं किया, चाहे भाजपा सत्ता में रही हो या विपक्ष में पंकज चौधरी पार्ची के साथ ही बने रहे। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के उम्मीदवार वीरेंद्र चौधरी को 35000 से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक, पंकज चौधरी पर पार्टी के शीर्ष नेताओं जैसे गृहमंत्री शाह और पीएम मोदी का वरदहस्त है। 2024 में गृहमंत्री शाह ने एक जनसभा के दौरान उनकी जमकर तारीफ की थी। उन्होंने पंकज को सबसे अनुभवी सांसद बताते हुए कहा था कि दिया लेकर ढूंढ़ने पर भी उनके जैसा व्यक्ति नहीं मिलेगा।
इतना ही नहीं, 2023 में गौरखपुर दौरे के दौरान पीएम मोदी भी पंकज चौधरी के घर पहुंचे थे। इस दौरान पीएम मोदी ने उनके परिवार के साथ खूब समय बिताया और नाश्ता-खाना करके ही लौटे थे। इसके बाद पंकज ने भी पीएम की तुलना भगवान राम और कृष्ण से की थी। इसके अलावा, पंकज चौधरी की निकटता सीएम योगी से भी खूब है।
उत्तर प्रदेश के अलग ओबीसी मतदाताओं की बात करें तो यादवों के बाद कुर्मी ही ऐसा समुदाय है, जिसकी संख्या सबसे ज्यादा है। इतना ही नहीं, कुर्मी समुदाय यूपी की 30 से 40 सीटों पर अपना गहरा असर रखते हैं।
2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यूपी भाजपा अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है। दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनावों में यूपी में भाजपा को आशानुरूप सफलता नहीं मिली थी, अखिलेश यादव के पीडिए वाले दांव ने भाजपा के वोटरों में तगड़ी सेंध लगाई थी। 2024 के चुनाव में राज्य में भाजपा की सीटें 2019 की तुलना में 62 से घटकर 33 रह गईं थी।
उस चुनाव में पूर्वांचल की कई कुर्मी बहुल सीटों पर सपा ने जीत हासिल की थी, इसका परिणाम यह हुआ कि भाजपा 2024 में पूर्ण बहुमत नहीं हासिल कर पाई थी। ऐसे में अब पंकज चौधरी को भाजपा अध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल में अपने उन्हीं वोटरों को वापस अपने पाले में लाना चाहती है।
इंडियन पालिटिक्स डेस्क।