अजय राय
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने शनिवार को प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहे विवाद पर उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की नियुक्ति न तो उत्तर प्रदेश सरकार करती है और न ही देश का कोई कानून। यह नियुक्ति सनातन परंपरा और धार्मिक प्रक्रिया के तहत होती है।
अजय राय ने शनिवार को लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं । उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शंकराचार्य के संबंध में दिया गया बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में पहले अपमान कराया गया और फिर विधानसभा में भी खुलकर अपमान किया गया।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि शंकराचार्य की नियुक्ति किसी मुख्यमंत्री द्वारा नहीं की गई है। सनातन धर्म की अपनी परंपरा है। मुख्यमंत्री भी नियुक्त होकर आए हैं, उनकी नियुक्ति किसने की है?
माघ मेले का जिक्र करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिस तरह संतों के साथ पुलिस और प्रशासन ने व्यवहार किया, वह निंदनीय है। संतों की चोटियां नोची गईं, मारपीट की गई। यह कानून का हनन करने वाली सरकार है।
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़े जाने के मामले में अजय राय ने कहा कि यह कोई एआई से बना वीडियो नहीं था, बल्कि वास्तविक घटना थी। उन्होंने कहा, “अगर वह वीडियो एआई से बना साबित हो जाए तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री ने स्वयं शंकराचार्य से आशीर्वाद लिया था और इसका वीडियो भी मौजूद है।
केंद्र सरकार की अमेरिका के साथ हुई व्यापारिक डील पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस समझौते से देश का किसान प्रभावित होगा। हम किसान अधिकार संवाद अभियान के तहत 75 जिलों में यात्रा कर चुके हैं और जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर जाएंगे।
प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर निशाना साधते हुए अजय राय ने कहा कि “यूपी में कानून व्यवस्था शून्य है।” उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात के लोग प्रदेश का काम ले जा रहे हैं। मनरेगा कानून में बदलाव और नाम परिवर्तन का भी उन्होंने विरोध किया और कहा कि सरकार इसे वापस ले।
इंडिययन पालिटिक्स न्यूज डेस्क।