बिहार सीएम नीतीश कुमार
लखनऊ। बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के साथ समाजवाद की राजनीति की बिसात बिछाने वाले पूर्व राज्यसभा सांसद किशन चंद त्यागी ने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया है। इस पटकथा तब लिखि गई जब त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग की लेकिन पार्टी के भीतर उन्हें समर्थन नहीं मिला। खासतौर से राजनीति के ‘चाणक्य’ माने जाने वाले नीतीश कुमार की सोची-समझी चुप्पी ने अंततः त्यागी को इस्तीफे की राह दिखा दी। अब वे नई राह तलाशने में जुटे हुए हैं। नीतीश के साथ दशकों तक काम करने वाले केसी त्यागी ने कहा कि बिहार में नीतीश के बीना जनता दल यूनाईटेड (जेडीयू) की कल्पना नहीं की जा सकती है।
श्री त्यागी ने कहा कि वह जल्द ही राजनीतिक तौर पर अपना ठिकाना तलाश लेंगे। जेडीयू को लेकर पूछे गए कुछ सवालों का त्यागी ने बेबाकी से जवाब दिया और कहा कि नीतीश के साथ उनके सम्बंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद बिहार में जो खालीपन आएगा उस शून्यता को नहीं भरा जा सकता है।
पूर्व राज्यसभा सांसद त्यागी से यह पूछे जाने पर कि नीतीश कुमार के बिहार सरकार से अलग होने के बाद वहां जेडीयू का भविष्य क्या होगा, इसपर त्यागी ने कहा, ” बिहार में नीतीश कुमार जेडीयू की आत्मा की तरह थे। जिस तरह शरीर से आत्मा के निकल जाने के बाद उसका कोई अस्तित्व नहीं रह जाता उसी तरह नीतीश के दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के बाद बिहार में जेडीयू का क्या भविष्य होगा यह कह पाना बड़ा मुश्किल है। बिहार में कार्यकर्ताओं के मन नीतीश कुमार को लेकर जो सम्मान था उसकी भरपाई कोई नेता नहीं कर सकता है।”
दरअसल, श्री त्यागी के करीबीयों की माने तो नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग की थी। इस मांग का समर्थन केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई नेताओं ने किया था लेकिेन इस मुद्दे पर जेडीयू के भीतर वह अलग- थलग पड़ गए। खासतौर से नीतीश कुमार की चुप्पी ने त्यागी को कठोर फैसला लेने के लिए मजबूर किया। नीतीश कुमार के साथ बिहार में जेडीयू को खड़ा करने में त्यागी ने काफी काम किया था। लेकिन नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद जेडीयू कितनी मजबूती से खड़ी हो पाएगी यह तो समय ही बताएगा।
त्यागी से यह पूछे जाने पर कि जेडीयू छोड़ने के बाद अब वह कहां जाएंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा, ” इंतजार कीजीए इसका फैसला 22 मार्च तक हो जाएगा। राजनीति करनी है तो कहीं तो जाना ही होगा लेकिन इसका खुलासा जल्द ही करूंगा। मेरे कुछ राजनीतिक मित्र, समर्थक और कार्यकर्ता 22 मार्च देश की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए समान विचारधारा वाले व्यक्तियों की एक बैठक का आयोजन कर रहे हैं। हम भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी, डॉ. राम मनोहर लोहिया जी और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर जी के विचारों और आदर्शों से प्रेरणा लेते रहेंगे।”
श्री त्यागी से यह पूछे जाने पर कि ऐसी खबरें चल रही हैं कि आप राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) का दामन थामेंगे, इस सवाल पर उन्होंने कहा, ” मैने आपसे पहले ही कहा कि इंतजार कीजीए। सबकुछ सामने आ जाएगा। अभी किसी भी तरह की अटकलें लगाने का वक्त नहीं है।”
नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में त्यागी ने कहा, ” क्या नीतीश कुमार इस सम्मान के हकदार नहीं है। आज नीतीश कुमार जैसा कोई नेता है जो वर्षों की राजनीति के बाद भी बेदाग हो। नीतीश कुमार समाजवादी आंदोलन के अनमोल रत्न हैं और वाकई वो इस सम्मान के हकदार हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले ही चौधरी चरण सिंह और कर्पुरी ठाकुर जैसे नेताओं का यह सम्मानित किया है।”
हालांकि सूत्रों की माने तो केसी त्यागी की रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी से बातचीत हो गई है और वह सीधेतौर से भाजपा में शामिल होने की बजाए रालोद में शामिल होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। ऐसा माना जा रहा है कि 22 मार्च को वह रालोद में जाने का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं।
गौरतलब है कि की श्री त्यागी समता पार्टी और जनता दल के विलय से अक्टूबर 2003 में अस्तित्व में आई पार्टी जदयू से जुड़े हुए थे। उन्होंने जदयू में मुख्य महासचिव, मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार सहित विभिन्न पदों पर कार्य किया था। हालांकि रालोद की तरफ से भाजपा से एक राज्यसभा सीट लेने पर मंथन काफी दिन से चल रहा है। अगर ऐसा होता तो रालोद में शामिल होने के बाद केसी त्यागी राज्यसभा जाने के बड़े दावेदार रहेंगे। ऐसी स्थिति में रालोद के साथ भाजपा के कई दावेदारों को मायूसी मिल सकती है वहीं जयंत चौधरी के लिए त्यागी पश्चिम में एक बड़ा चेहरा साबित हो सकते हैं।
इंडियन पालिटिक्स ब्यूरो।