आनंद राय
विद्या शंकर राय
उत्तर प्रदेश में ग़ाज़ीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट हमेशा से हाई प्रोफ़ाइल सीट रही है। इस सीट की अहमियत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजनीतिक अदावत में भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। इस सीट पर बाहुबली मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय परिवार के बीच वर्चस्व की लड़ाई चलती आ रही है लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर मिली हार ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आला कमान को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
भाजपा के सूत्रों की मानें तो कुछ दिन पहले ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह के नेतृत्व में 2022 में हारी गई विधानसभा सीटों पर नए समीकरणों को लेकर मंथन किया गया था। ये सीटें भाजपा की प्राथमिकता में शामिल हैं। इन्हीं सीटों में गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट भी है जिस पर समाजवादी पार्टी (सपा) और अंसारी परिवार का क़ब्ज़ा है।
दरअसल भाजपा के सूत्रों की माने तो हारी हुई सीटों पर पार्टी का फोकस ज़्यादा है। इन सीटों पर पार्टी नए समीकरण और नए चेहरों की तलाश में जुटी हुई है। पार्टी के एक पदाधिकारी बताते हैं कि विनिबिलिटी को ही महत्व दिया जाएगा इसके लिए कठोर फैसले लेने से भी पार्टी पीछे नहीं हटेगी।
पार्टी ने अपनी हारी हुई विधानसभा सीटों पर मंथन और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस करते हुए, पार्टी ने उन निर्वाचन क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर कमियों को सुधारने और नए सिरे से रणनीति बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। अंदरखाने पार्टी की तरफ़ से उन सीटों पर सर्वे भी करा रही है।
गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट भी उन्हीं सीटों में शामिल है जहाँ पार्टी नए चेहरे की तलाश में जुटी हुई है। इसी कड़ी में इस सीट से दिवंगत विधायक कृष्णानंद राय के भतीजे आनंद राय उर्फ मुन्ना राय का नाम तेजी से उभर कर सामने आ रहा है। पिछली बार इस सीट से कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालाकि अब अलका राय की जगह उनके पुत्र पीयूष राय भी अपनी तैयारी में जुटे हुए हैं।
मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट को लेकर कृष्णानंद राय के भतीजे आनंद राय ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए कहा है कि उनकी पहली प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ना है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि टिकट नहीं मिलता है तो अन्य विकल्प भी खुले रहेंगे।
श्री राय ने कहा कि उन्होंने अपनी चुनाव लड़ने की इच्छा से पार्टी नेतृत्व को अवगत करा दिया है और उसी के अनुरूप तैयारियों में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा, “ मैंने चुनाव लड़ने की मंशा से नेतृत्व को अवगत करवा दिया है। पहली प्राथमिकता भाजपा है, लेकिन टिकट न मिलने की स्थिति में अन्य विकल्प भी खुले हुए हैं।”
आनंद राय ने बताया कि उन्होंने अपने दिवंगत चाचा कृष्णानंद राय के साथ साये की तरह काम किया और उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। उनका दावा है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उनकी मेहनत की वजह से ही भाजपा प्रत्याशी अलका राय को जीत मिली थी।
मोहम्मदाबाद सीट पर कई दावेदारों के सवाल पर उन्होंने कहा, “चुनाव लड़ना सबका अधिकार है। सभी लोग तैयारी कर रहे हैं, लेकिन मोहम्मदाबाद की जनता के लिए हमने काफी काम किया है। जनता का पहले भी प्यार मिला है और आगे भी मिलेगा।”
गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट लंबे समय से प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीटों में गिनी जाती है। इस सीट से कभी कृष्णानंद राय चुनाव लड़ते थे, जबकि दूसरी ओर मुख्तार अंसारी परिवार का भी यहां प्रभाव रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अलका राय को मैदान में उतारा था, लेकिन मुख्तार अंसारी के भतीजे सुहैब अंसारी उर्फ मन्नू अंसारी ने जीत दर्ज की थी।
पार्टी से जुड़े एक करीबी नेता के अनुसार, कृष्णानंद राय की हत्या के बाद परिवार में राजनीतिक विघटन हुआ। आनंद राय ने वर्ष 2005 से 2016 तक लगातार धमकियों के बीच लगभग एक दशक बिताया। 2017 में अलका राय ने चुनाव जीता, लेकिन 2022 में पारिवारिक विवादों के कारण हार का सामना करना पड़ा।
आनंद राय ने कहा कि उनका पूरा ध्यान 2027 के चुनाव पर है और वे लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं। उन्होंने कहा, “अपना काम मेहनत करना है। किसी से कोई शिकायत नहीं है। चुनाव तो हर हाल में लड़ूंगा।”
हाल ही में एक निजी मीडिया हाउस द्वारा कराए गए सर्वे में 79 प्रतिशत लोगों ने उन्हें आनंद राय को पसंदीदा चेहरा बताया, जबकि पीयूष राय को 10 प्रतिशत और मनोज राय को 5 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया था।
आनंद राय की पत्नी वर्तमान में भावर कोल ब्लॉक प्रमुख हैं । आनंद अभी प्रतिनिधि के तौर पर कामकाज देख रहे हैं और मोहम्मदाबाद क्षेत्र में भाजपा के प्रमुख दावेदारों में गिने जाते हैं। साथ ही वे मुख्तार अंसारी और उनके परिवार के खिलाफ मुखर राजनीतिक रुख के लिए भी जाने जाते हैं।
इंडियन पालिटिक्स न्यूज ब्यूरो।