रावलकोट
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में स्थानीय चुनावों के पहले चरण के दौरान भारी हिंसा, खूनखराबा और अराजकता फैल गई है। एक ओर जहां राजनीतिक पार्टियां एक-दूसरे पर खुलेआम चुनाव में धांधली का आरोप लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की गोलीबारी ने रावलकोट और कोटली जैसे इलाकों को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है।
रावलकोट के भयावह हालात: सड़कों पर लाशें और खून
रावलकोट में पिछले 52 दिनों से चल रहे 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) के प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी बलों द्वारा की गई कार्रवाई ने खौफनाक रूप ले लिया है। स्थानीय लोगों के बयान बेहद डरावने हैं। रावलकोट में मौजूद चश्मदीद और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील भाई ने वीडियो जारी कर बताया कि वहां हर तरफ लाशें और घायल लोग नजर आ रहे हैं। उन्होंने भारी हथियारों से की गई फायरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरियों का खून सड़कों पर बह रहा है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पाकिस्तानी रेंजर्स ने शांतिपूर्ण तरीके से मार्च कर रहे लोगों पर सीधे गोलियां चलाईं। एक घटना में 15 से 20 लोगों को गोली लगने की पुष्टि हुई है, जिससे हताहतों की संख्या काफी अधिक होने की आशंका है।
अस्पतालों में एंबुलेंस और गाड़ियां कम पड़ गई हैं, और लोग अपने कंधों पर घायलों को ले जाने के लिए मजबूर हैं। स्थानीय लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।
एक चश्मदीद ने बताया, "हालात बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं। रावलकोट में लाशें ही लाशें हैं। जख्मी ही जख्मी हैं। खुदा हमारा साथ दे। अभी अपनी जान बचाकर आया हूं। जो भी नेशनल मीडिया देख रही है, प्लीज हमारा साथ दें। बेशुमार लाशें पड़ी हैं।"
चुनाव में खुलेआम धांधली और हत्या
मीरपुर डिवीजन की 13 विधानसभा सीटों पर हो रहे मतदान का पहला चरण बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं और राजनीतिक हिंसा का शिकार हुआ है। कोटली जिले के निक्याल में मतदान के दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के 35 वर्षीय कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
PPP के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो-जरदारी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हत्या और बूथ कैप्चरिंग का सीधा आरोप पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के समर्थकों पर लगाया है।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार किया है। स्थानीय अधिकारियों का आरोप है कि इस चुनाव के नतीजे पाकिस्तान की सेना पहले ही तय कर चुकी है, ताकि क्षेत्र में उनका नियंत्रण और कड़ा हो सके।
विरोध प्रदर्शन की मुख्य वजह
PoJK में यह गुस्सा अचानक नहीं भड़का है। लगातार चल रहे इस जन-आंदोलन की प्रमुख वजहें इस प्रकार हैं।
600 से अधिक नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी रिहाई की मांग हो रही है। सरकार ने नागरिक अधिकारों की बात करने वाली समिति JAAC को प्रतिबंधित कर दिया है।
लोग महंगाई, बिजली-पानी की कमी और संसाधनों के भारी शोषण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर भी लंबे समय से तनाव बना हुआ था, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया।
चुनाव की आड़ में पाकिस्तानी सेना और प्रशासन द्वारा नागरिक अधिकारों के दमन ने PoJK में मानवाधिकारों का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। धांधली और राज्य प्रायोजित हिंसा ने वहां के लोगों को बगावत पर मजबूर कर दिया है।