पानीपत.
चीनी के अप्रत्याशित बढ़ते दाम का एक कारण प्रदेश में गन्ने का कम होता रकबा भी है। प्रदेश में गन्ने का बिजाई क्षेत्र बढ़ती लागत, कम रेट, मजदूरों की कमी व दूसरी फसलों से किसानों का गन्ने से मोह भंग होता जा रहा है।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में 29,188 किसानों ने 1,42,193 एकड़ में गन्ने की फसल की थी। 2025 में 29,062 किसानों ने 1,63,287 एकड़ में गन्ने की काश्त की थी। इस वर्ष 28,663 किसानों ने 1,62,534 एकड़ में गन्ना उगाया है।
चीनी मिलों का ब्योरा
प्रदेश में कुरुक्षेत्र के शाहाबाद, पानीपत के डाहर, अंबाला के नारायणगढ़, यमुनानगर, सोनीपत और गोहाना, रोहतक के भाली और महम, पलवल, करनाल, असंध, भादसों, जींद और कैथल में चीनी मिल स्थापित हैं।
सरकार का रकबा और पैदावार दोनों बढ़ाने पर जोर
गन्ने का रकबा और पैदावार दोनों बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को उन्नत किस्में उपलब्ध करवाए जाने की योजना है। इसके अलावा किसानों को गन्ने की नई बिजाई पर प्रति एकड़ पांच हजार रुपये अनुदान और कीटनाशकों पर 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। टाप बोरर की रोकथाम के लिए ट्रैप और ल्योर मुफ्त उपलब्ध कराए गए हैं। गन्ना कटाई के लिए मशीनें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
गन्ना घटने के पांच बड़े कारण –
- चीनी मिलों की ओर से निश्चित समयावधि में गन्ना नहीं लेना।
- मक्का, धान और सब्जियों की फसलों की अपेक्षा कम आय होना।
- मजदूरों की कमी से कटाई-छिलाई में बड़ी परेशानी।
- कई तरह की बीमारी और कीट से दवाओं का बढ़ता खर्च।
- नकदी फसलों की तरह समय पर भुगतान नहीं होना।