नई दिल्ली
भारत में 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने का लक्ष्य नजदीक आ रहा है। इसके बावजूद दुनिया की हर तीन में से एक बालिका वधु भारतीय है और देश में हर 5 में से एक लड़की की शादी 18 साल की उम्र से पहले ही हो जाती है। हालांकि, भारत में बाल विवाह की दर 1996 में 50 फीसदी से ज्यादा थी, जो अब घटकर लगभग 20 रह गई है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय औसत को देखकर गुमराह नहीं होना चाहिए, क्योंकि कुछ राज्यों में यह समस्या कहीं अधिक गंभीर है। यूनिसेफ और सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, देश में होने वाले कुल बाल विवाह में से आधे से ज्यादा 5 राज्यों (उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश) में होते हैं। बाल विवाह पर लगाम लगाने के मामले में केरल और लक्षद्वीप अच्छी प्रगति कर रहे हैं।
यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा, 'इस साल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम 'बाल विवाह खत्म करें और लड़कियों के अधिकारों में निवेश करें' है। यह किशोरावस्था के दौरान लगातार निवेश करने का आह्वान करती है, ताकि लड़कियां स्कूल न छोड़ें, स्वस्थ व सुरक्षित रहें, उनमें कौशल विकास हो, वे अवसरों का लाभ उठाएं और खुद के जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों में अपना पक्ष रख सकें।' भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बाल सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रयासों के जरिए लड़कियों के अधिकारों को आगे बढ़ाने और बाल विवाह में कमी लाने की दिशा में प्रगति की है। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ लड़कियों की आवाज, निर्णय लेने की क्षमता और भागीदारी को मजबूत करने से यह प्रगति और तेज होगी।
22 करोड़ युवतियों की शादी 17 की उम्र से पहले
सिंथिया ने कहा, 'लड़कियां सिर्फ विकास की लाभार्थी नहीं, बल्कि उसमें सक्रिय रूप से योगदान देने वाली भी हैं। जब लड़कियों के पास आत्मविश्वास, हुनर और आगे बढ़कर नेतृत्व करने के लिए सुरक्षित माहौल होता है, तो वे मजबूत परिवार, समुदाय और समाज के निर्माण में मदद करती हैं।' यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 20-24 साल के आयु वर्ग में शामिल 22.4 करोड़ से ज्यादा युवतियों की शादी 17 साल की उम्र से पहले हो गई थी। इनमें से 9 करोड़ से ज्यादा युवतियों का विवाह 15 साल से कम उम्र में ही करा दिया गया था। यूनिसेफ का अनुमान है कि दुनिया में हर तीन सेकंड में एक लड़की की शादी होती है और ऐसी शादियों की संख्या हर दिन 1,500 तक पहुंच सकती है
कितने परेशान करने वाले हैं आंकड़े
क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू की CEO पूजा मारवाह ने कहा कि भारत ने इस समस्या से निपटने में काफी प्रगति की है, लेकिन बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने में अब भी काफी समय लगेगा। उन्होंने कहा, 'भारत में बाल विवाह के मामलों में कमी आना अच्छी बात है, लेकिन देश में हर पांच में से एक लड़की की शादी अब भी बालिग होने से पहले कर दी जाती है। इससे भी अहम बात यह है कि राष्ट्रीय औसत के कारण अलग-अलग राज्यों और ग्रामीण व शहरी इलाकों के बीच के बड़े अंतर का पता नहीं चल पाता है।' जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने कहा कि सरकार की कोशिशों से बाल विवाह के मामलों में कमी लाने में मदद मिली है, लेकिन कम आय वाले परिवारों में यह प्रथा अब भी काफी आम है। बेहद गरीब लोग ही अपनी बेटियों की कम उम्र में शादी करने का फैसला करते हैं, क्योंकि वे उन्हें खाना नहीं खिला सकते और उनकी रोजमर्रा जिंदगी की जरूरतें पूरी नहीं कर सकते। इसलिए इसमें सरकार की अलग-अलग योजनाओं की सफलता भी अहम भूमिका निभाती है।