पीएम मोदी
विद्या शंकर राय
India-China Relations: तियानजिन में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात भारत-चीन रिश्तों में अहम मोड़ मानी जा रही है। सात साल बाद चीन पहुंचे मोदी ने बॉर्डर, व्यापार और ग्लोबल सहयोग पर चर्चा की। जानें इस मुलाकात में किन मुद्दों पर बातचीत हुई।
भारत और चीन का रिश्ता हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। कभी बॉर्डर पर तनाव तो कभी व्यापार में टकराव। लेकिन 31 अगस्त, रविवार को तियानजिन में पीएम नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने इन रिश्तों में नई जान डाल दी। इस दौरान सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि असली मुद्दों पर गहराई से चर्चा हुई।
यह पीएम मोदी का सात साल बाद चीन का दौरा है। 2018 के बाद पहली बार उन्होंने शी जिनपिंग से आमने-सामने मुलाकात की। इस दौरान सीमा प्रबंधन, व्यापार और सांस्कृतिक साझेदारी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत हुई। खास बात यह है कि यह मुलाकात ऐसे वक्त पर हुई जब अमेरिका ने भारत और चीन दोनों पर टैरिफ बढ़ा दिए हैं और चीन शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की अध्यक्षता कर रहा है।
शी जिनपिंग ने भारत और चीन को प्राचीन सभ्यताओं और बड़ी आबादी वाले देश बताते हुए कहा कि दोनों को ‘ड्रैगन और हाथी’ की तरह साथ आकर शांति और विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छे पड़ोसी और सच्चे साझेदार बनकर चलना ही दुनिया के लिए सही संदेश होगा।
पीएम मोदी ने 2024 में कजान में हुई सकारात्मक बातचीत को याद किया और कहा कि सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद माहौल शांत हुआ है। उन्होंने भरोसे, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ रिश्ते आगे बढ़ाने की बात कही। मोदी ने यह भी दोहराया कि भारत-चीन सहयोग सिर्फ 2.8 अरब लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की भलाई के लिए जरूरी है। उन्होंने SCO समिट में आमंत्रण के लिए शी को धन्यवाद दिया और संगठन की सफल अध्यक्षता पर बधाई दी।
मोदी-जिनपिंग के बीच बातचीत की अहम बातें-
- भारत-चीन रिश्तों पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं, लेकिन तियानजिन में हुई मोदी-शी मुलाकात ने साफ कर दिया कि दोनों देश रिश्तों को नया मोड़ देने के लिए तैयार हैं।
- दोनों नेताओं ने पुष्टि की कि उनके विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा प्रबंधन पर समझौता किया है। मोदी ने कहा, ‘डिसएंगेजमेंट के बाद सीमा पर हालात शांतिपूर्ण हैं।’ यह बयान 2020 के लद्दाख विवाद के बाद काफी अहम माना जा रहा है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी बड़ा कदम उठाया गया। कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू की गई है, जिसे विश्वास बढ़ाने की दिशा में प्रतीकात्मक पहल माना जा रहा है।
- लोगों और कारोबार को जोड़ने के लिए दोनों देशों ने सीधी हवाई सेवाएं फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। मोदी ने कहा, “हमारे सहयोग से 2.8 अरब लोगों का हित जुड़ा है और यह पूरी मानवता की भलाई का रास्ता खोलेगा।
- शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन पर विकासशील देशों को आगे बढ़ाने की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। मोदी ने भी यही बात दोहराई कि दोनों देशों का सहयोग पूरी इंसानियत के लिए फायदेमंद होगा।
- दोनों नेताओं ने माना कि दुनिया के बड़े संगठन सबकी बात सुनें, ताकत का संतुलन कई देशों में फैले और दक्षिण एशिया में शांति बनी रहे, इसके लिए भारत और चीन को मिलकर काम करना जरूरी है।
- शी ने यह भी याद दिलाया कि 2025 में भारत-चीन के आपसी रिश्तों को 75 साल पूरे हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को सोच-समझकर और लंबे समय की सोच के साथ रिश्तों को संभालना चाहिए।
- तियानजिन में हुई यह मुलाकात दिखाती है कि भारत और चीन अब टकराव से आगे बढ़कर सहयोग का रास्ता तलाश रहे हैं। सीमा प्रबंधन, धार्मिक यात्रा और एयर कनेक्टिविटी जैसे फैसले इस सकारात्मक रुख की मिसाल हैं।
- यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब अमेरिका ट्रेड और टेक्नोलॉजी पर दोनों देशों के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है। ऐसे में मोदी और शी का साथ खड़ा होना बड़ी बात है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।
- हालांकि भरोसा बनाने और सीमा विवाद पूरी तरह सुलझाने जैसी चुनौतियां अभी भी बाकी हैं, लेकिन इस बैठक ने दोनों देशों को एक स्थिर और व्यावहारिक रास्ता चुनने का संकेत जरूर दिया है।